Bihar Land Record

जमीन का केवाला खो गया है तो दोबारा नकल कैसे प्राप्त करें? जानिए पूरा तरीका

August 23, 2026Riya1 min read
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जमीन खरीदने या बेचने के बाद मिलने वाला केवाला (Sale Deed/Registered Deed) जमीन के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होता है। इसमें जमीन के खरीदार, विक्रेता, प्लॉट/खाता संबंधी विवरण, जमीन का क्षेत्रफल, बिक्री की जानकारी और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है।

लेकिन कई बार घर बदलने, पुराने दस्तावेज खराब होने, आग, पानी, चोरी या किसी अन्य कारण से जमीन का मूल केवाला खो जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। यदि केवाला विधिवत पंजीकृत था, तो परिस्थितियों के अनुसार संबंधित Sub-Registrar/Registration Office से उसकी प्रमाणित प्रति यानी Certified Copy/Nakal प्राप्त की जा सकती है।

बिहार में पंजीकृत दस्तावेजों की जानकारी खोजने और प्रमाणित प्रति से संबंधित ऑनलाइन सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। बिहार के आधिकारिक भूमि-जंकरी पोर्टल के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड को विभिन्न विवरणों जैसे Registration Office, तारीख, Deed Number, Plot Number, Khata Number, Party Name आदि से खोजा जा सकता है।

केवाला खो जाने पर क्या करें?

अगर जमीन का मूल केवाला खो गया है, तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मूल केवाला खो जाने का मतलब जमीन का मालिकाना हक खत्म हो जाना नहीं है।

यदि जमीन का बिक्री विलेख सही तरीके से पंजीकृत है और उसका रिकॉर्ड संबंधित पंजीकरण कार्यालय में उपलब्ध है, तो उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया की जा सकती है।

सबसे पहले पुराने दस्तावेजों में से जितनी जानकारी मिल सके, उसे इकट्ठा करें।

जैसे:

  • केवाला नंबर/Deed Number
  • Serial Number
  • रजिस्ट्रेशन वर्ष
  • रजिस्ट्रेशन कार्यालय
  • खरीदार का नाम
  • विक्रेता का नाम
  • जमीन का मौजा
  • थाना/अंचल
  • खाता नंबर
  • खसरा/प्लॉट नंबर
  • जमीन का क्षेत्रफल
  • रजिस्ट्रेशन की अनुमानित तारीख

इनमें से सभी जानकारी उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। जितनी अधिक जानकारी होगी, रिकॉर्ड खोजने में उतनी आसानी हो सकती है।

बिहार में केवाला की नकल कैसे खोजें?

यदि जमीन बिहार में है, तो पंजीकृत दस्तावेजों से संबंधित जानकारी के लिए बिहार के Bhumijankari पोर्टल पर विभिन्न Search सुविधाएं उपलब्ध हैं।

पोर्टल पर दस्तावेज खोजने के लिए Registration Office, तारीख, Serial Number, Deed Number, Khata Number, Plot Number, Mauja और Party Name जैसे विकल्प दिखाई देते हैं।

बिहार Bhumijankari आधिकारिक पोर्टल

Syep 1: केवाला की उपलब्ध जानकारी इकट्ठा करें

सबसे पहले घर में पुराने कागजात, रसीद, बैंक दस्तावेज, म्यूटेशन के कागजात या जमीन से संबंधित अन्य दस्तावेज खोजें।

कई बार दूसरे दस्तावेजों में केवाला नंबर या रजिस्ट्रेशन की तारीख लिखी होती है।

उदाहरण के लिए यदि किसी पुराने दस्तावेज में लिखा है:

तो इन विवरणों की मदद से रिकॉर्ड खोजने में काफी आसानी हो सकती है।

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Step 2: ऑनलाइन रिकॉर्ड खोजें

बिहार के Bhumijankari पोर्टल पर उपलब्ध Search सुविधा से जमीन के पंजीकृत दस्तावेज की जानकारी खोजी जा सकती है।

विभिन्न परिस्थितियों में आप इन विवरणों से खोज करने की कोशिश कर सकते हैं:

Deed Number से

यदि आपके पास केवाला नंबर है तो यह सबसे आसान तरीका हो सकता है।

Party Name से

यदि केवाला नंबर नहीं है तो खरीदार या विक्रेता के नाम से रिकॉर्ड खोजने का विकल्प उपयोगी हो सकता है।

Plot Number से

प्लॉट नंबर उपलब्ध होने पर उससे संबंधित रिकॉर्ड खोजने का प्रयास किया जा सकता है।

Khata Number से

खाता नंबर भी जमीन के पंजीकृत दस्तावेज की पहचान करने में मदद कर सकता है।

Registration Office और Year से

यदि आपको पता है कि किस निबंधन कार्यालय में और किस वर्ष जमीन की रजिस्ट्री हुई थी, तो उस जानकारी से भी रिकॉर्ड खोजा जा सकता है।

बिहार के पोर्टल पर Pre-Computerisation और Post-Computerisation रिकॉर्ड के लिए भी अलग-अलग खोज विकल्प उपलब्ध हैं।

kewala search

Step 3: Certified Copy यानी प्रमाणित नकल के लिए आवेदन करें

सिर्फ ऑनलाइन दिखाई देने वाली जानकारी और Certified Copy एक जैसी चीजें नहीं हैं।

यदि आपको जमीन के कानूनी काम के लिए आधिकारिक प्रमाणित प्रति चाहिए, तो संबंधित पंजीकरण विभाग की उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार Certified Copy प्राप्त करें।

प्रमाणित प्रति मूल पंजीकृत दस्तावेज का आधिकारिक रिकॉर्ड-आधारित प्रतिरूप होती है।

बिहार के आधिकारिक पोर्टल पर Certified Copy से संबंधित Search सुविधा उपलब्ध है।

16 दिसंबर 2024 के बाद के दस्तावेजों के लिए क्या करें?

यह जानकारी खास तौर पर बिहार के जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

बिहार Bhumijankari पोर्टल पर वर्तमान सूचना के अनुसार, वहां उपलब्ध पंजीकृत दस्तावेजों का डेटा 15 दिसंबर 2024 तक है। 16 दिसंबर 2024 के बाद पंजीकृत दस्तावेजों के लिए Certified Copy Module of eNibandhan portal का उपयोग करने की सूचना दी गई है।

इसलिए यदि आपका केवाला 16 दिसंबर 2024 के बाद रजिस्टर्ड हुआ है, तो पुराने Bhumijankari Search में रिकॉर्ड न मिलने पर यह जरूरी नहीं कि दस्तावेज मौजूद नहीं है। संबंधित eNibandhan सुविधा में जांच करना चाहिए।

अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है तो क्या करें?

कई लोगों को समस्या होती है कि उन्हें ऑनलाइन केवाला नहीं मिल रहा है।

इसका मतलब यह नहीं है कि जमीन का रिकॉर्ड खत्म हो गया है।

पुराने दस्तावेजों के मामले में डिजिटाइजेशन, रिकॉर्ड उपलब्धता या पुराने रजिस्ट्रेशन डेटा की स्थिति अलग हो सकती है।

ऐसी स्थिति में संबंधित Sub-Registrar Office/Registration Office से संपर्क करें।

उन्हें उपलब्ध जानकारी दें:

  • जमीन के मालिक का नाम
  • खरीदार का नाम
  • विक्रेता का नाम
  • रजिस्ट्रेशन वर्ष
  • अनुमानित रजिस्ट्रेशन तारीख
  • Deed Number
  • Serial Number
  • Plot Number
  • Khata Number
  • Mauja
  • Registration Office

जितनी अधिक सही जानकारी देंगे, पुराने रिकॉर्ड को खोजने में उतनी मदद मिल सकती है।

अगर केवाला बहुत पुराना है तो क्या करें?

बहुत पुराने केवाले के मामले में स्थिति अलग हो सकती है।

यदि जमीन की रजिस्ट्री कंप्यूटरीकरण से पहले हुई थी, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड सीमित हो सकता है। बिहार के आधिकारिक Search सिस्टम में Pre-Computerisation रिकॉर्ड के लिए भी अलग विकल्प उपलब्ध है।

ऐसे मामले में संबंधित पुराने Registration Office में रिकॉर्ड की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेना उचित है।

पुराने केवाले के लिए केवल ऑनलाइन खोज पर निर्भर न रहें।

केवाला नंबर भी याद नहीं है तो क्या करें?

यह बहुत सामान्य समस्या है।

यदि आपको केवाला नंबर बिल्कुल याद नहीं है तो भी जमीन की पहचान से संबंधित अन्य जानकारी के आधार पर रिकॉर्ड खोजने का प्रयास किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए:

खरीदार का नाम + विक्रेता का नाम + रजिस्ट्रेशन कार्यालय + वर्ष

या

प्लॉट नंबर + मौजा + रजिस्ट्रेशन वर्ष

या

खाता नंबर + जमीन मालिक का नाम

जैसी जानकारी उपयोगी हो सकती है।

बिहार के Search सिस्टम में Party Name, Plot Number, Khata Number, Mauja और अन्य विवरणों से खोज के विकल्प उपलब्ध हैं।

क्या सिर्फ जमीन की रसीद से केवाला निकाला जा सकता है?

जमीन की लगान रसीद या अन्य राजस्व दस्तावेज जमीन से संबंधित जानकारी देने में मदद कर सकते हैं, लेकिन रसीद और Sale Deed एक ही दस्तावेज नहीं हैं।

रसीद से आपको जमीन की पहचान संबंधी कुछ जानकारी मिल सकती है, लेकिन केवाले की प्रमाणित प्रति के लिए संबंधित पंजीकरण रिकॉर्ड से दस्तावेज प्राप्त करना पड़ता है।

इसलिए रसीद को संभालकर रखें क्योंकि उसमें दर्ज विवरण पुराने केवाले को खोजने में उपयोगी हो सकते हैं।

क्या म्यूटेशन के कागज से केवाला खोजा जा सकता है?

कई मामलों में म्यूटेशन/नामांतरण से जुड़े दस्तावेजों में पुराने बिक्री विलेख की जानकारी मिल सकती है।

यदि आपके पास म्यूटेशन का आदेश, आवेदन या अन्य कागजात हैं, तो उन्हें ध्यान से देखें।

इनमें कभी-कभी:

  • Deed Number
  • Registration Date
  • Seller Name
  • Buyer Name
  • Plot Number

जैसी जानकारी मिल सकती है।

इन विवरणों के आधार पर Registration Office में रिकॉर्ड खोजना आसान हो सकता है।

केवाला खोने के बाद FIR या गुमशुदगी की रिपोर्ट जरूरी है?

यदि मूल केवाला चोरी हुआ है या कहीं खो गया है, तो परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय पुलिस में शिकायत/गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराना उपयोगी हो सकता है।

विशेष रूप से तब जब आपको आशंका हो कि किसी अन्य व्यक्ति को आपके मूल दस्तावेज का गलत इस्तेमाल करने का अवसर मिल सकता है।

लेकिन केवल FIR/गुमशुदगी रिपोर्ट अपने आप में केवाले की प्रमाणित प्रति नहीं होती।

प्रमाणित प्रति के लिए संबंधित Registration Office/पंजीकरण विभाग की प्रक्रिया का पालन करना होगा।

केवाला की नकल मिलने के बाद क्या जांचें?

जब आपको Certified Copy मिल जाए तो उसे ध्यान से जांचें।

देखें कि इसमें:

  • खरीदार का नाम सही है
  • विक्रेता का नाम सही है
  • जमीन का प्लॉट नंबर सही है
  • खाता नंबर सही है
  • जमीन का क्षेत्रफल सही है
  • मौजा सही है
  • चौहद्दी सही है
  • रजिस्ट्रेशन नंबर सही है
  • रजिस्ट्रेशन की तारीख सही है

यदि किसी विवरण में संदेह हो तो संबंधित अधिकारी या प्रॉपर्टी वकील से जानकारी लें।

केवाला खोने से जमीन चली जाती है क्या?

सिर्फ मूल केवाला खो जाने से जमीन अपने आप किसी दूसरे व्यक्ति की नहीं हो जाती।

मूल दस्तावेज का खो जाना एक गंभीर दस्तावेजी समस्या है, लेकिन पंजीकृत जमीन के रिकॉर्ड संबंधित सरकारी पंजीकरण व्यवस्था में उपलब्ध हो सकते हैं।

इसीलिए केवाला खो जाने पर सबसे पहले घबराने के बजाय उसके पंजीकृत रिकॉर्ड की जानकारी खोजनी चाहिए और आवश्यकता होने पर प्रमाणित प्रति प्राप्त करनी चाहिए।

हालांकि, जमीन के मालिकाना हक या किसी विवाद के मामले में केवल एक दस्तावेज पर निर्भर न रहें। पूरे रिकॉर्ड और वर्तमान कानूनी स्थिति की जांच जरूरी हो सकती है।

केवाला की नकल लेते समय इन गलतियों से बचें

1. गलत Registration Office में आवेदन न करें

पहले यह पता करें कि जमीन की रजिस्ट्री किस कार्यालय में हुई थी।

2. नाम की Spelling पर ध्यान दें

पुराने रिकॉर्ड में नाम की वर्तनी अलग हो सकती है। इसलिए पुराने दस्तावेजों में लिखे नाम के अनुसार खोज करना उपयोगी हो सकता है।

3. सिर्फ Plot Number पर निर्भर न रहें

एक ही क्षेत्र में समान या मिलते-जुलते नंबर हो सकते हैं। Plot Number के साथ Mauja, Khata, Party Name और Registration Year जैसी जानकारी भी मिलाएं।

4. नकली वेबसाइट से सावधान रहें

सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने के नाम पर किसी अनजान वेबसाइट या व्यक्ति को OTP, बैंक विवरण या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें।

सरकारी पोर्टल का इस्तेमाल करें।

केवाला खो जाने से बचने के लिए आगे क्या करें?

एक बार Certified Copy मिल जाने के बाद आगे से दस्तावेज को सुरक्षित रखना जरूरी है।

आप:

  • मूल दस्तावेज को सुरक्षित स्थान पर रखें
  • Certified Copy अलग रखें
  • स्कैन करके PDF बनाकर सुरक्षित रखें
  • महत्वपूर्ण दस्तावेज का बैकअप रखें
  • भरोसेमंद परिवार सदस्य को दस्तावेज की जानकारी दें
  • Deed Number और Registration Date अलग से नोट करके रखें

हालांकि डिजिटल कॉपी को सुरक्षित रखना उपयोगी है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह हर कानूनी उद्देश्य के लिए Certified Copy का विकल्प हो।

निष्कर्ष

अगर जमीन का केवाला खो गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले पुराने दस्तावेजों से Deed Number, Registration Year, Registration Office, Party Name, Plot Number, Khata Number और जमीन से संबंधित अन्य जानकारी जुटाएं।

बिहार में पंजीकृत दस्तावेजों को खोजने के लिए Bhumijankari पोर्टल पर विभिन्न Search विकल्प उपलब्ध हैं और Certified Copy से संबंधित सुविधा भी दी गई है।

वहीं, बिहार सरकार के पोर्टल पर दी गई वर्तमान सूचना के अनुसार 16 दिसंबर 2024 के बाद पंजीकृत दस्तावेजों के लिए eNibandhan के Certified Copy Module का उपयोग किया जाना है।

यदि रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं मिलता, विशेषकर पुराने रजिस्ट्रेशन के मामले में, तो संबंधित Registration Office/Sub-Registrar Office से संपर्क करके रिकॉर्ड की उपलब्धता और प्रमाणित नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया जानें।

महत्वपूर्ण नोट: जमीन और पंजीकरण से जुड़े नियम राज्य और समय के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए किसी संपत्ति विवाद, बिक्री, बैंक लोन, न्यायालयी मामले या बड़े आर्थिक लेन-देन में अंतिम कदम उठाने से पहले संबंधित सरकारी कार्यालय या योग्य संपत्ति-कानून विशेषज्ञ से वर्तमान प्रक्रिया की पुष्टि करें।

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